इंसान अकेला कब होता है ?
वो जो अकेला बैठा होता है ?
या फिर वो,
जो किसी के साथ होकर भी अकेला होता है ?
मैंने यह महसूस किया है,
कोई ना हो, तो भी वो तनहा नहीं ।
वो दुनिया से और दुनिया उससे गुफ़्तगू करती है ।
बंद अकेले कमरे में भी,
वो हज़ारों लोगों के साथ होता है ।
फिर मैंने वो भी शख़्स देखा है,
कहने को तो उसके साथ,
उसका हमराही बैठा है I
कहने को तो वो लोगों से घिरा रहता है ।
पर फिर भी मैंने उसे न अकेले होके भी अकेला देखा है ।

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